
मैँ अभी तक ख़ुद को धुंद रहा हूँ. वैसे मेरा नाम अशोक है. कवितायैन प्रभात के नाम से लिखता हूँ. एक कंपनी में बतौर स्र. रायटर कम कर रहा हूँ. कोशिश कर रहा हूँ, एक बेमतलब जिंदगी में मतलब धूंद्ने कि.
कवितयैन लिखकर, अपने अनुभवों को छोटी छोटी रच्नवोन में प्रिओकर मन थोड़ा हलका हो जाता है. उन्म्मे करता हूँ ये रच्नयैन आपको अच्छी लगेगी.
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