पड़ोस में ही रहतीं हैं दीपू की मम्मी, दीपू, और दीपू के पापा। दीपू अभी चार साल का ही होगा। दीपू के पापा export की एक company में धागा काटने का काम करते हैं। 6 हजार मिल जाते होंगे महिना।
हर रोज आते हुए देखता हूँ की दीपू के पापा बिरजू हलवाई से पाव भर जलेबी ले आते हैं, घर पे। दीपू की मम्मी को जलेबी बड़ी पसंद हैं। दीपू के ही पापा ने एक बार बात ही बात में बताया था।
कल शाम घर पहुंचा ही था तो देखा पड़ोस से रोने गाने की आवाज आ रही है। वहां गया तो पता चला दीपू के घर में ही हल्ला हो रहा है। दरवाजे तक पहुंचा तो देखता हूँ पास पड़ोस के लोग जमवाड़ा बनाकर खड़े हैं। कुछ औरतें हैं जो दीपू की मम्मी को पकडे हुए है। और दीपू की मम्मी हैं जो संभले नहीं संभल रही हैं। दीपू पास में बैठा जलेबी चबा रहा है। और दीपू के पापा
दीपू के पापा पड़े हुए हैं एक तरफ, फर्श पर। मृत। dead।
मैं और देर नहीं खड़ा हो पाया, और अपने कमरे की तरफ आ गया। बाद में पता चला की दीपू के पापा आज थोडा जल्द ही पहुँच गए थे। सीने में दर्द की शिकायत कर रहे थे। बगल वाले डॉ पांडे को दिखाया तो उन्होंने दर्द कम होने की कोई गोली दे दी।
दर्द तो कम नहीं हुआ, हाँ दीपू के पापा का शरीर जरूर शांत हो गया।
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